Sunday, 8 December 2013

प्रासंगिक - अंतर्राष्ट्रीय जल सहयोग वर्ष 2013





कविता सागर जानेवारी 2014
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अंतर्राष्ट्रीय जल सहयोग वर्ष ...


ये हम सभी को भली-भांति ज्ञात है कि मनुष्य के लिए पानी हमेशा से एक महत्वपूर्ण और जीवन-दायक पेय रहा है, यह सभी जीवों के जीवित रहने के लिए अनिवार्य है. ऐसा वैज्ञानिक तथ्य है कि एक मनुष्य बिना भोजन के लगभग दो माह तक जीवित रह सकता है किन्तु बिना पानी के उसका एक सप्ताह भी जिंदा रहना मुश्किल है. इसी के साथ हम सभी को ये भी अच्छी तरह से पता है कि पृथ्वी से लगातार पेयजल में कमी होती जा रही है. भविष्य के जल-संकट को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व भर में 22 मार्च को विश्व जल दिवस मनाने की शुरुआत की, जिसकी घोषणा रियो डि जेनेरियो में वर्ष 1992 में आयोजित पर्यावरण तथा विकास का संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन (यूएनसीईडी) में 22 मार्च को की गई. और सर्वप्रथम वर्ष 1993 में 22 मार्च के दिन पूरे विश्व में जल दिवस के मौके पर जल के संरक्षण और रख-रखाव पर जागरुकता फैलाने का कार्य किया गया. इस प्रकार से एक बड़ी वैश्विक समस्या को अन्तर्राष्ट्रीय कैलंडर में दाखिल किया गया ताकि सबके संयुक्त प्रयासों से इसका समाधान किया जा सके.

संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रत्येक वर्ष विश्व जल दिवस मनाने के लिए एक अलग थीम तैयार की जाती है. इसके चलते वर्ष 2013 को अंतर्राष्ट्रीय जल सहयोग वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय दिसम्बर 2010 में लिया गया। अंतर्राष्ट्रीय जल सहयोग वर्ष के रूप में संयुक्त राष्ट्र संघ ने सबके लिए जल, जल का सार्थक उपयोग तथा जल के संरक्षण पर विशेष जोर दिया है। यहाँ यह उल्लेखनीय है कि यह सहयोग शांतिपूर्ण एवं स्थाई विकास की नींव डालता है, गरीबी घटाने में कारगर हो सकता है, जल संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा एवं शान्ति को बढ़ावा देने में मददगार हो सकता है.

पूरी धरती का ७० प्रतिशत भाग जल होने के बाद भी इस पानी का कुल एक प्रतिशत ही मनुष्य की आवश्यकताओं के लिये उपयोगी है. जल सहयोग हेतु सभी को जल की उपलब्धता करवाना मुख्य मुद्दा है. आने वाले समय में बिना जल-संरक्षण के ऐसा कर पाना कठिन कार्य होगा. इस दृष्टि से जल संरक्षण भी एक बड़ा मुद्दा है. आज हमारा मुख्य लक्ष्य जलसंसाधनों का संरक्षण और उनका सतत उपयोग सुनिश्चित करना है. इसके अलावा शुद्ध पेयजल की आपूर्ति भी एक मुद्दा बना हुआ है. विडंबना ये है कि धरती के हर नवें इंसान को ताजा और साफ़ पानी उपलब्ध नहीं है, इसलिए संक्रमण और जल संसाधनों से जुडी बीमारियों के कारण प्रतिवर्ष ३५ लाख लोगों की मृत्यु होती है. दुनिया के ज्यादातर बड़े हिस्सों में पीने योग्य पानी तक लोगों की पहुंच अपर्याप्त होती है और वे बीमारी के कारकों, रोगाणुओं या विषैले तत्वों के अस्वीकार्य स्तर या मिले हुए ठोस पदार्थों से संदूषित स्रोतों का इस्तेमाल करते हैं. विकासशील देशों में जलजनित रोगों को कम करना सार्वजनिक स्वास्थ्य का एक प्रमुख लक्ष्य है.

आज हमारा देश ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण विश्व जल-संकट जैसी चुनौती से जूझ रहा है. इसके अलावा वैश्विक स्तर पर सभी देशों द्वारा जल-संरक्षण के प्रति आपसी सहयोग तथा दो देशों के मध्य जल के प्रति सकारात्मक सहयोग भी बहुत बड़ी चुनौती के रूप में सामने आया है. दरअसल जल सहयोग के द्वारा संयुक्त राष्ट्र संघ का उद्देश्य दो देशों के मध्य भी जल के प्रति सकारात्मक सहयोग बनाना भी रहा है. संयुक्त राष्ट्र संघ के इस वर्ष के प्रस्ताव में इस तथ्य की तरफ ध्यान आकर्षित किया गया है कि जल संसाधनों की स्पष्ट सीमाएं निर्धारित नहीं हैं. धरती पर ४६% जल संसाधन कई देशों के बीच स्थित हैं और उन्हें बांटने वाले देशों की संख्या १४८ है. इसके कारण कई समस्याएँ पैदा होती हैं, जिन्हें केवल घनिष्ठ अन्तर्राष्ट्रीय सहयोग के द्वारा ही सुलझाया जा सकता है.

इस वर्ष का जल सहयोग के रूप में प्रमुख कार्य लोगों में पानी के बारे में जागरूकता बढाने और उन तक उसकी अहमियत की जानकारी पहुंचाने का होना चाहिए. जल के उपयोग में मितव्ययता बरतनी होगी. किसी भी तरह से पानी की बर्बादी को रोकना होगा. बारिश के जल के संरक्षण के उपाय भी खोजने होंगे तथा घरेलु उपयोग में भी जल-संरक्षण के प्रति जागरूक होना पड़ेगा. यदि हम आज इसका उपयोग सावधानी एवं किफायत से न करेंगे तो भविष्य में स्थिति अत्यंत ही गंभीर हो सकती है.

संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2013 को अंतर्राष्ट्रीय जल सहयोग वर्ष (International Year of Water Cooperation) के रूप में घोषित किया है। दिसम्बर 2010,  में संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2013 को अंतर्राष्ट्रीय जल सहयोग वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। संयुक्त राष्ट्र संघ ने सबके लिए जल, जल का सार्थक उपयोग तथा जल के संरक्षण के लिए ही वर्ष 2013 को अंतर्राष्ट्रीय जल सहयोग वर्ष के रूप में मनाने का निश्चय किया है। हर साल लाखों टन जल की बर्बादी होती है। वर्ष 2013 को अंतर्राष्ट्रीय जल सहयोग वर्ष के रूप मनाने का निर्णय इस लिए भी लिया गया है क्योंकि विश्व के सभी देश जल के संरक्षण और उसके रख-रखाव के बारे में ठोस कदम उठा सके।

जल से सम्बंधित विश्व भर के रोचक तथ्य -

o       एक व्यक्ति अपने पूरे जीवनकाल में लगभग 60,000 लीटर पानी पी जाता है।
o       हमारे देश के सारे अखबारों को एक दिन की छपाई के लिए लगभग 2,000 लाख गैलन पानी की ज़रूरत होती है।
o       एक किलोवाट जल विध्दुत के लिए 400 गैलन पानी की आवश्यकता होती है।
o       दूषित पानी पीने से दुनिया भर में हर साल लगभग 22 लाख लोग मरते हैं।
o       एक व्यक्ति बिना भोजन किये 2 महीने जीवित रह सकता है लेकिन पानी पिये बगैर मुश्किल से एक हफ्ता ही जीवित रह सकता है।
o       दुनिया भर में प्रति 10 व्यक्तियों में से 2 व्यक्तियों को पीने का शुद्ध पानी भी नहीं मिलता है।
o       हमारी पृथ्वी का लगभग 71 % हिस्सा जल से भरा है, जो कुल एक अरब 40 घन किलो लीटर पानी के रूप में है। लेकिन इसमें से 97.3 % पानी समुद्र में है, बाकि शेष 2.7 % पानी नदियों, तालाबों और कुँओं में है।

                                                जल है तो जीवन है

  




धरणीमाता

तू माय मी लेकरू
धरणीमाता तुला कसा विसरू
रानात चरती गाय वासरू
किल बिल करती चिमणी पाखरू
मायेचा तुझ्या हा खेळ सुरु
फुल झाडे रानात सारे
शोभून दिसती फुलपाखरे
पाहुनी आनंदी झालं तुझ लेकरू
धरणीमाता तुला कस विसरू
तू माय मी लेकरू
नदी नाले झुळ झुळ करी
गाणे गाती सुरात सारे
दंग होऊन गेले रानात सारे
कवतुक तुझे मी किती करू
तू माय मी लेकरू

- अनिल धुदाट (पाटील)
जामगांव, बुलढाणा
दर्यादिल


किती काळ लोटला
तुला दर्यावरी जाऊन ?

काजळतो देह माझा
वाट तुझी पाहून

आतुरला गार वारा
तुझ्या माझ्या भेटीसाठी

बरस जलधारा
ऊन मोकळ्या कायेसाठी

अदिबंध फुलतो हा
तुझे चलचित्त न्याहाळून

कधी भेटशील मिठीत
गंध उधळ्या शिंगासाठी

गाऊ दे गीत मला
रान कोवळ्या मायेसाठी

किती काळ लोटला
तुला दर्यावरी जाऊन ?

- प्रा. अनिलकुमार राजाराम पाटील
हिंगणगाव, सांगली

उच्छाद
दुष्काळात मरणाच्या काठावर -
जगण्याचं स्वप्न पाहत होतो.
मृत्यूच्या  वाटेवर यमाला चकवीत -
तुझ्या प्रतीक्षेत जगात होतो.

समोर मरण दिसून देखील -
जगावे असे वाटत होते.
दुरून डोंगर साजरे जसे -
प्रलोभन मला फसवत होते.

अचानक प्रचंड मेघ दाटीने -
आकाश अंधारून आले होते.
दाटलेल्या काळ्या नभातून
मेघ अविरत कोसळत होते.

धुवाधार वादळी वर्षावात -
अवघे जग बधीर होते.
अंधारात चाचपडणारे मन -
निवा-यासाठी आसुसले होते.

तरी हि काळे कुट्ट ढग -
एकटाक बरसत होते.
कोठेतरी आस-यासाठी -
नौकेचे सहाय्य हवे होते.

जगण्याची आशा बाळगूनही -
नौकेत पाणी घुसत होते.
पण तुझ्याच प्रहाराने मरण -
अवचितपणे बिलगत होते.  


- अशोक दादा पाटील
जयसिंगपूर, कोल्हापूर
मी लिहीन गाणी

आषाढातील मेघामधूनि
येत पाऊस मत्त गर्जुनि
सहज कवळिता त्याला धरणी
मी लिहीन गाणी

सुसाट वारा येता धावूनि
माड हासतो पानामधूनि
प्रीतीने घेत कवटाळूनि
मी लिहीन गाणी

रौद्र प्रपाता सहज झेलूनि
हास्य रसाचे तुषार उडवूनि
शांत करितसे त्याला धरणी
मी लिहीन गाणी

काळोखाचे पटल भेदूनि
सूर्यबिंब ते येता गगनी
सृष्टी डुलता साद घालूनि
मी लिहीन गाणी

वसंत येता नटते धरणी
फुलाफुलांचे साज लेवूनि
तारुण्याचे गमक समजूनि
मी लिहीन गाणी    

- श्रीपाद दिगंबर पुजारी
जयसिंगपूर, कोल्हापूर

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